🇮🇳🎂🇮🇳 अखण्ड भारत के निर्माता, मौर्य साम्राज्य के संस्थापक, भारत के प्रथम शक्तिशाली ऐतिहासिक सम्राट, कुशल सेनानायक, महान विजेता, योग्य शासक, न्यायप्रिय सम्राट, प्रजापालक, राष्ट्ररक्षक, भारत के प्रथम चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की 2364वीं जयन्ती पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई, मंगलकामनाएँ, धम्मकामनाएँ...
चन्दवड्ढनो राजस्स मोरिय रञ्ञो सा अहु,
राजमहेसी धम्ममोरिया पुत्ता तस्सासि चन्दगुप्तो'ति!
मोरियवंसजं चन्दगुप्त नामकुमार अहस,
वेसाखंमासे कण्हंट्ठमी दिवसे उप्पाजित्वा।
तं कुमारदिस्वा पुत्तसिंहने नामगहणं दिवसे,
चन्दोसभेनरक्खिता चन्दगुप्तो’ति नामकत्वा पोसेसि ॥
—उत्तरविहारट्टकथायं-थेरमहिंद
लगभग 374 ईसा पूर्व में पिप्पलिवन के मोरिय (मौर्य) खत्तिय (क्षत्रिय) राजा 'चन्द्रवर्द्धन' का शासन था, तब उनकी प्रधान महारानी 'धम्ममोरिया' बनी. उन दोनों से उत्पन्न पुत्र 'चन्द्रगुप्त' नाम से जगत में विख्यात हुए. ज्ञात पिता के विख्यात पुत्र चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म लगभग 345 ईसा पूर्व, वैशाख मास के कृष्णपक्ष अष्टमी को उत्पन्न होकर राजकुमार सिंह पुत्र चन्द्रमा के समान शोभायमान थे।
सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की अजेय गज सेना विश्व प्रसिद्ध थी. उनके पास 7 लाख से भी अधिक नियमित सैनिक थे. इसमें 6 लाख पैदल, 30 हजार घुड़सवार, 9 हजार हाथी और लगभग 8 हजार रथ थे. जब यह चतुरंगिणी सेना कहीं पड़ाव डालती, तो लाखों लोगों का एक विशाल नगर -सा बस जाता था.
इस प्रकार भारत के महान विजेता परम प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने हिमालय से विंध्य पर्वत तक और बंगाल से हिन्दुकुश पर्वतमाला (अफगानिस्तान) तक एकछत्र शासन स्थापित किया था. भारत के इतिहास में यह पहली घटना थी और भगवान बुद्ध के 240 वर्ष बाद की घटना थी. बुद्ध की अहिंसा से भारत में सैनिक भावना लुप्त हुई थी आदि तथाकथित धारणाएँ कितनी हास्यास्पद और झूठी है, आप स्वयं निष्कर्ष निकाल सकते हैं. विषमतावादियों का यह धूर्त प्रलाप कितना मक्कारीपूर्ण और हास्यास्पद है.
"एक बार जो निर्णय कर लो, फिर पलटकर मत देखो. क्योंकि बार-बार पलटकर देखने वाले कभी विजयी नहीं होते. "
— सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य
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चन्दवड्ढनो राजस्स मोरिय रञ्ञो सा अहु,
राजमहेसी धम्ममोरिया पुत्ता तस्सासि चन्दगुप्तो'ति!
मोरियवंसजं चन्दगुप्त नामकुमार अहस,
वेसाखंमासे कण्हंट्ठमी दिवसे उप्पाजित्वा।
तं कुमारदिस्वा पुत्तसिंहने नामगहणं दिवसे,
चन्दोसभेनरक्खिता चन्दगुप्तो’ति नामकत्वा पोसेसि ॥
—उत्तरविहारट्टकथायं-थेरमहिंद
लगभग 374 ईसा पूर्व में पिप्पलिवन के मोरिय (मौर्य) खत्तिय (क्षत्रिय) राजा 'चन्द्रवर्द्धन' का शासन था, तब उनकी प्रधान महारानी 'धम्ममोरिया' बनी. उन दोनों से उत्पन्न पुत्र 'चन्द्रगुप्त' नाम से जगत में विख्यात हुए. ज्ञात पिता के विख्यात पुत्र चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म लगभग 345 ईसा पूर्व, वैशाख मास के कृष्णपक्ष अष्टमी को उत्पन्न होकर राजकुमार सिंह पुत्र चन्द्रमा के समान शोभायमान थे।
सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की अजेय गज सेना विश्व प्रसिद्ध थी. उनके पास 7 लाख से भी अधिक नियमित सैनिक थे. इसमें 6 लाख पैदल, 30 हजार घुड़सवार, 9 हजार हाथी और लगभग 8 हजार रथ थे. जब यह चतुरंगिणी सेना कहीं पड़ाव डालती, तो लाखों लोगों का एक विशाल नगर -सा बस जाता था.
इस प्रकार भारत के महान विजेता परम प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने हिमालय से विंध्य पर्वत तक और बंगाल से हिन्दुकुश पर्वतमाला (अफगानिस्तान) तक एकछत्र शासन स्थापित किया था. भारत के इतिहास में यह पहली घटना थी और भगवान बुद्ध के 240 वर्ष बाद की घटना थी. बुद्ध की अहिंसा से भारत में सैनिक भावना लुप्त हुई थी आदि तथाकथित धारणाएँ कितनी हास्यास्पद और झूठी है, आप स्वयं निष्कर्ष निकाल सकते हैं. विषमतावादियों का यह धूर्त प्रलाप कितना मक्कारीपूर्ण और हास्यास्पद है.
"एक बार जो निर्णय कर लो, फिर पलटकर मत देखो. क्योंकि बार-बार पलटकर देखने वाले कभी विजयी नहीं होते. "
— सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य
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सम्राट मिशन
