उन्नाव में विद्यालय बनते जा रहे हैं व्यापार
उन्नाव में कई मान्यता प्राप्त विद्यालयों में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी के आदेशों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां नया सत्र शुरू होते ही रहे हैं परेशान विद्यालय संचालक द्वारा किताबों की लिस्ट न देने के बजाय सिर्फ कमीशन बंदी हुई दुकान का नाम बता दिया जाता है दुकानदार विद्यालय के संचालकों की सेटिंग से दुकानदार अपने मन मुताबिक किताबों की रकम अभिभावक और छात्रों से वसूलते है। किसी विद्यालय में बुक ओं की लिस्ट दी जाती है पर लेकिन छात्रों दूसरी दुकानों पर किताबें उपलब्ध नहीं होती है विद्यालय संचालकों की सेटिंग किए हुए दुकानों पर ही बुके उपलब्ध होती हैं जिससे दुकानदार अपने मन मुताबिक बुक ओं का मूल्य लगाता है। गरीब असहाय अभिभावक एक बड़े बोज तले दब जाता है अमीर और पैसे वाला अभिभावक को कुछ फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह अच्छे कारोबार में लगा हुआ है और अच्छे पैसे कमा रहा है । हर मां बाप की इच्छा होती है अपने बच्चे को अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा देने की लेकिन गरीब अभिभावक शिक्षा माफियाओं के कारण अपने बच्चों को उत्तम शिक्षा दिलाने के लिए असफल हो जाते हैं सरकार के आदेशानुसार खुलेआम सरकार की धज्जियां उडाई जा रही हैं । विद्यालय के संचालकों द्वारा छात्रों से कंप्यूटर, ट्रंक, बिल्डिंग , फंक्शन फीस, डेवलपमेंट आदि,फीस के नाम से मोटी रकम वसूलते है । शिक्षा विभाग को संज्ञान में लेते हुए उन्नाव में ऐसे विद्यालयों की पुष्टि करें। गलत तरीके से कार्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। जिससे गरीब भी अपने बच्चों को उत्तम शिक्षा दिला सके।
उन्नाव में कई मान्यता प्राप्त विद्यालयों में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी के आदेशों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां नया सत्र शुरू होते ही रहे हैं परेशान विद्यालय संचालक द्वारा किताबों की लिस्ट न देने के बजाय सिर्फ कमीशन बंदी हुई दुकान का नाम बता दिया जाता है दुकानदार विद्यालय के संचालकों की सेटिंग से दुकानदार अपने मन मुताबिक किताबों की रकम अभिभावक और छात्रों से वसूलते है। किसी विद्यालय में बुक ओं की लिस्ट दी जाती है पर लेकिन छात्रों दूसरी दुकानों पर किताबें उपलब्ध नहीं होती है विद्यालय संचालकों की सेटिंग किए हुए दुकानों पर ही बुके उपलब्ध होती हैं जिससे दुकानदार अपने मन मुताबिक बुक ओं का मूल्य लगाता है। गरीब असहाय अभिभावक एक बड़े बोज तले दब जाता है अमीर और पैसे वाला अभिभावक को कुछ फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह अच्छे कारोबार में लगा हुआ है और अच्छे पैसे कमा रहा है । हर मां बाप की इच्छा होती है अपने बच्चे को अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा देने की लेकिन गरीब अभिभावक शिक्षा माफियाओं के कारण अपने बच्चों को उत्तम शिक्षा दिलाने के लिए असफल हो जाते हैं सरकार के आदेशानुसार खुलेआम सरकार की धज्जियां उडाई जा रही हैं । विद्यालय के संचालकों द्वारा छात्रों से कंप्यूटर, ट्रंक, बिल्डिंग , फंक्शन फीस, डेवलपमेंट आदि,फीस के नाम से मोटी रकम वसूलते है । शिक्षा विभाग को संज्ञान में लेते हुए उन्नाव में ऐसे विद्यालयों की पुष्टि करें। गलत तरीके से कार्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। जिससे गरीब भी अपने बच्चों को उत्तम शिक्षा दिला सके।
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